मस्ती की पाठशाला - एक रोमाचंक कहानी भाग-46
उधर नीचे भी कामदेव मेहरबान तहे... गौरी के अरमान आज पुर होने जा रहे तहे.. अमित की साँसों की गंध अब तक महसूस कर रही गौरी जाना नही चाह रही थी.. पर लाइट जलने पर रोशन हो चुके कमरे में अमित के साथ वो असहज महसूस कर आयी थी..,"तुमने जवाब नही दिया.. मैं अब जाउ क्या?"
"जाना होता तो उसको रोक ही कौन सकता था.. अमित इश्स बात को जानता था," तुम्हारी मर्ज़ी है.. पर मैं तो लेना चाहता हूँ..."
"क्या?" हालाँकि मतलब वह समझ गयी थी.. उसके चेहरे के भावों और नज़रें झुका कर पूच्छे गये 'क्या' से सॉफ पता चलता था..
"तुम्हे सब पता है.. लड़की के पास एक बेचारे लड़के को देने के लिए 'क्या' होता है.." अमित ने गौरी की जांघपर अपना हाथ रख दिया..
"माहौल फालतू बातों की इजाज़त नही दे रहा था.. अन्यथा गौरी लड़कों को बेचारा कहने पर उस'से भिड़ने को तैयार हो जाती.. नज़रें झुकाए हुए ही उसने जवाब दिया," मुझे डर लग रहा है.."
'ग्रीन सिग्नल!' भला इश्स बात को अमित क्यूँ ना समझता.. जांघों से सरकता हुआ उसका हाथ गौरी की मच्चली के बिल्कुल करीब से होता हुआ उसकी 26" कमर और फिर वहीं जाकर थम गया.. जहाँ लड़की मा बन'ने से पहले इतराती हैं और बाद में घबराती हैं..' कहीं ढीले ना हो जायें...'
प्रतिरोध ना के बराबर ही था.. वहाँ से उसका हाथ हटाकर गौरी ने अपने हाथ में ले लिया..," तुम्हे में सच में अच्छि लगती हूँ क्या?"
"ये भी कोई पूच्छने की बात है.. क्या कभी आईने ने नही बताया?" अमित का हाथ लाख संयम बरतने की कोशिश के बाद भी अपनी जाँघ में उच्छल रहे 'शिकारी' को खुरचने चला गया.. साइज़ गौरी के लिए विस्मयकारी था.. उसकी मच्चली में कुलबुलाहट सी होने लगी..,"धोका तो नही दोगे?"
"अगर मौका नही मिला तो...." अमित का मजाकिया और बेबाक लहज़ा ही अब तक गौरी को वहाँ बैठा रहने पर विवस कर रहा था..
"तुम भी ना.. चलो बताओ क्या लेना चाहते हो.. मुझसे!" गौरी ने शर्मीली मुस्कुराहट के साथ अमित को वापस लाइन पर लाने के लिए सवाल किया...
"नाम बताऊं क्या?"
"नही.. ऐसे ही बता दो.." गौरी झेंप गयी..
"ठीक है.. अपने कपड़े निकाल दो.."
"नही.. पहले लाइट ऑफ!"
"लाइट बंद करने पर क्या फ़ायदा.. अगर देख ही ना पाए.."
"पर मुझे शर्म आ रही है.." गौरी अमित से नज़रें नही मिला पा रही थी..
"ठीक है.. तुम आँखें बंद कर लेना.. शरम भाग जाएगी..
"पर...." गौरी कुच्छ कहना चाह ही रही थी की अमित घुटनो के बल बैठा और उसकी टी-शर्ट नीचे कोनों से पकड़ कर उपर सरका दी.. ट्यूब-लाइट की रोशनी में गौरी के दूधिया कबूतर फड़फने लगे.. उनका आकर इतना मादक था की अमित पूरी शर्ट निकलना ही भूल गया और उसके गले में ही छ्चोड़ कर उसके गोल गोल अनारों को अपने हाथों में दबोच लिया...
"इष्हशह!" गौरी की कामुक सिसकी भी उसके बदन की तरह ही पागल कर देने वाली थी.. अमित के होंठों ने जैसे ही उसकी चूचियों से दूध निकालने की नाकामयाब कोशिश की.. गौरी का अंग अंग लहरा उठा.. वह मदहोश होकर बिस्तेर पर आ गिरी.. "आआआअह प्लस्ससस्स.. शियरट्ट तो.. आआह ...निकालने दो.."
"एक मिनिट!" कहते हुए अमित ने गौरी की चूचियों को चूस्ते हुए ही एक हाथ से उसकी शर्ट निकलवाने में मदद की.. वह इतनी मदहोश हो चुकी थी.. की सिसकिया लेते हुए बड़बड़ाने लगी,"आआह.. मुझे भी कुच्छ लेना है.."
नेकी और पूच्छ पूच्छ.. पलक झपकते ही अमित ने अपनी पॅंट अंडरवेर के साथ ही उतार फैंकी.. गौरी के लिए उसका ख़तनाक खिलौना तैयार खड़ा था.. तनटनाता हुआ..,"ये लो मेरी जान!" और घुटनो के बल होते हुए अमित ने अपना 'शेरू' गौरी के हाथों में पकड़ा दिया..
"यहाँ नही.. वहाँ.." गौरी का हाथ उसकी लोवर के उपर से ही मानो कुच्छ ढूँढ सा रहा था..
"जल्दी है क्या..?"
"हां.. दिशा और वाणी में से कोई उठ गयी तो.."
"ठीक है.. पूरा मज़ा फिर कभी.. पूरी जिंदगी पड़ी है.. चलो.. उल्टी लेट जाओ.."
"उल्टी क्यूँ.. ऐसे ही ठीक नही है क्या?"
"या तो तुम इनस्टरक्टर बन जाओ.. या फिर मेरी बात मान लो.." अमित ने धोंस सी दिखाई..
"ठीक है.. " गौरी ने कहा और अपनी छातियों के नीचे तकिया रखकर उल्टी होकर लेट गयी....
अमित ने एक पल भी ना लगाया और उसका लोवर और पॅंटी नीचे खींच कर नितंबों को आवरण हीन कर दिया...
"ओह माइ गॉड!... म्म्म्मममममहा!" गौर के गोरे गोरे मोटे मस्त नितंबों की सुंदरता और सुगधा देख कर अमित यही कह पाया.. "क्या माल हो यार तुम भी.."
दोनो फांकों के बीच की दरार अच्छि ख़ासी चौड़ी लग रही थी.. पर जब अमित ने उंगली घुसाने की कोशिश की तो अहसास हुआ.. कितनी टाइट है.. गहरी भी.. अमित ने फांको को अलग करके जहाँ तक अमित की नज़र गयी.. सब कुच्छ कोरा और गोरा था..
अमित ने बेड पर पड़ा तकिया उठाया और गौरी को अपने नितंब उपर उठाने का इशारा किया.. ज्यों ही गौरी उपर को हुई.. अमित ने तकिया उसके नीचे सेट कर दिया.. नितंबों की उँचाई और बढ़ गयी.. दरार और फैल गयी.. दरार के बीचों बीच दूधिया सफेद रंग की हल्के बालों वाली मच्चली मुस्कुरा रही थी.. अमित ने उपर से ही उसका दाना ढ़हूँढने की कोशिश की तो गौरी अंदर तक हिल गयी.. इतना आनंद उसको अपनी उंगली से कभी नही आया था..," प्लीज़ जल्दी करो.. मैं 2 बार तो पहले ही हो चुकी हूँ.."
"हूंम्म.. वो तो दिख ही रहा है.. रस से सनी अपनी उंगली बाहर निकालकर देखते हुए अमित ने फिदा हो चुकी नज़रों से उसको देखा.. बड़ी मादक गंध थी..
अमित ने उसकी टाँगों को थोड़ा दूर करके योनि चिद्रा को देखकर कहा..," तो पहली बार है.. नही?"
"क्या मतलब?" गौरी ने सच में उसका मतलब नही समझा..
"सेक्स.. और क्या?"
बात सुनकर गौरी को धक्का सा लगा.. अचानक पलटी खाकर बैठ गयी और अपने हर अंग को च्छुपाने की कोशिश करती हुई रोना सा मुँह बना लिया..
"क्या हुआ?"
"तो क्या तुम मुझे..." गौरी सच में रोने लगी...
"सॉरी जानू.. आइ वाज़ जस्ट जोकिंग.. मज़ाक कर रहा था यार.."
"नही.. मुझे नही करना.."
"प्लीज़ गौरी.. ऐसा मत करो.. छ्होटे से मज़ाक से ही रूठह गयी. तुम्हे तो पता है.. मेरी मज़ाक करने की आदत है.. रियली सॉरी यार.. प्लीज़" अमित ने उसको अपनी बाहों में भर लिया.. बड़ी मुश्किल से गौरी शांत हुई..
गौरी वापस उसी हालत में लेटने लगी तो अमित ने एकद्ूम शरीफों की तरह कहा," यहाँ से और उपर उठ जाओ ना.. प्लीज़.. घुटने बेड पर रख कर.. हां हां.. ऐसे ही.. अपना चेहरा बेड पर ही रखो.. यस यस ऐसे ही.. थॅंक यू!"
किसी ने सच ही कहा है..
"बिस्तेर पर तो रानी ही राजा होती है.. और राजा उसका सेवक" जाने कितनी ही सभ्यता एक ही घुड़की से अमित के बोल में आ गयी थी..
अमित ने जब इश्स अवस्था में गौरी के पिच्छवाड़े को देखा तो पागलपन में कोई कमी ना रही.. अमित ने एक से बढ़कर एक को देखा था पर गौरी के आगे तो सब पानी भरती ही लगी..
अमित के होंठ गौरी की चूत से खेलने लगे.. गौरी भी इश्स 'टच' से बदहवास सी सिसकिया ले लेकर अपने आपको ज़्यादा से ज़्यादा खोलने में लगी थी..
जी भर कर अमित ने रसास्वादन किया... चूत फूल कर और भी स्वदिस्त और सुंदर हो गयी थी...
ज़्यादा देर किस भी लिहाज से अब ठीक नही थी..
अमित ने उसके पिछे पोज़िशन ली और लंड का सूपड़ा गौरी की चिकनी चूत के मुंहने पर लगा दिया..," थोड़ा दर्द होगा.. एक बार.. सहन कर लेना प्लीज़.."
गौरी इश्स बात को समझती थी.. उसने अपना मुँह तकिये में दबा लिया और 'काम' कर्ण का इशारा किया..
'चिरर्र' की आवाज़ के साथ ही गौरी के गौरांग का श्री गणेश हो गया.. खून नही आया पर हालत खून ख़राबे से बदतर थी.. लंड कुच्छ दूरी तय करके जैसे जाम सा हो गया.. तकिये के अंदर से गौरी की घुटि हुई सी चीखें रह रह कर अमित को अभियान रोक देने पर विवश कर रही थी..
"चलो हो गया" की अनुभूति अमित को गौरी के उस अंदाज से हुई जब उसने तकिये से मुँह उठाकर एक लंबी साँस ली.. लंड भी तक तक गौरी की जड़ों तक 2-4 बार हो आया था.. अब गौरी के चेहरे पर असीम सुख और आनंद के भाव थे.. गौरी ने अपनी टाँगों को और ज़्यादा खोल दिया..
कसी हुई योनि में अब उसका लंड सररर सररर की आवाज़ के साथ अंदर बाहर हो रहा था.. अमित को करीब 15 मिनिट हो चुके थे बिना रुके बिना थके लगे हुए.. पर गौरी इश्स दौरान 2 बार स्वर्ग लोक हो आई थी..
अंत में जब अमित को अहसास हुआ की अब टिकना मुश्किल है तो उसने ढकधक धक्कों की गति तेज़ कर दी.. गौरी तीसरी बार 'आ' गयी..
गौरी की इश्स बार की लुंबी साँस के साथ ही अमित ने अपना हथियार बाहर खींच लिया.. अच्च्छा ही किया वरना सब कुच्छ अंदर ही हो जाता.. जस्न का जोश जारी था.. गाढ़े वीरया की पिचकारी पसारकार उल्टी लेट चुकी गौरी के नितंबों को निहाल करने लगी...
गौरी को जैसे इसी बात का इंतजार था.. झट से उठी और अपने को सॉफ करके कपड़े पहनती हुई बोली... "अगली बार देखूँगी तुमको.." कहते हुए अमित के होंठों का एक करारा चुंबन लिया और कपड़े पहेनकर चुपके से बाहर निकली.. और अपनी खाट पर जाकर इश्स प्रथम अनुभव की मिठास को अपने मॅन में महसूस करने लगी...
अंदर बैठा अमित खुद ब खुद मुस्कुरा रहा था,"क्या गन्ना था.. कसम से!"
पर उसका तो यही तराना था.. गन्ना उखाड़ो और खेत से बाहर!
उधर नीचे भी कामदेव मेहरबान तहे... गौरी के अरमान आज पुर होने जा रहे तहे.. अमित की साँसों की गंध अब तक महसूस कर रही गौरी जाना नही चाह रही थी.. पर लाइट जलने पर रोशन हो चुके कमरे में अमित के साथ वो असहज महसूस कर आयी थी..,"तुमने जवाब नही दिया.. मैं अब जाउ क्या?"
"जाना होता तो उसको रोक ही कौन सकता था.. अमित इश्स बात को जानता था," तुम्हारी मर्ज़ी है.. पर मैं तो लेना चाहता हूँ..."
"क्या?" हालाँकि मतलब वह समझ गयी थी.. उसके चेहरे के भावों और नज़रें झुका कर पूच्छे गये 'क्या' से सॉफ पता चलता था..
"तुम्हे सब पता है.. लड़की के पास एक बेचारे लड़के को देने के लिए 'क्या' होता है.." अमित ने गौरी की जांघपर अपना हाथ रख दिया..
"माहौल फालतू बातों की इजाज़त नही दे रहा था.. अन्यथा गौरी लड़कों को बेचारा कहने पर उस'से भिड़ने को तैयार हो जाती.. नज़रें झुकाए हुए ही उसने जवाब दिया," मुझे डर लग रहा है.."
'ग्रीन सिग्नल!' भला इश्स बात को अमित क्यूँ ना समझता.. जांघों से सरकता हुआ उसका हाथ गौरी की मच्चली के बिल्कुल करीब से होता हुआ उसकी 26" कमर और फिर वहीं जाकर थम गया.. जहाँ लड़की मा बन'ने से पहले इतराती हैं और बाद में घबराती हैं..' कहीं ढीले ना हो जायें...'
प्रतिरोध ना के बराबर ही था.. वहाँ से उसका हाथ हटाकर गौरी ने अपने हाथ में ले लिया..," तुम्हे में सच में अच्छि लगती हूँ क्या?"
"ये भी कोई पूच्छने की बात है.. क्या कभी आईने ने नही बताया?" अमित का हाथ लाख संयम बरतने की कोशिश के बाद भी अपनी जाँघ में उच्छल रहे 'शिकारी' को खुरचने चला गया.. साइज़ गौरी के लिए विस्मयकारी था.. उसकी मच्चली में कुलबुलाहट सी होने लगी..,"धोका तो नही दोगे?"
"अगर मौका नही मिला तो...." अमित का मजाकिया और बेबाक लहज़ा ही अब तक गौरी को वहाँ बैठा रहने पर विवस कर रहा था..
"तुम भी ना.. चलो बताओ क्या लेना चाहते हो.. मुझसे!" गौरी ने शर्मीली मुस्कुराहट के साथ अमित को वापस लाइन पर लाने के लिए सवाल किया...
"नाम बताऊं क्या?"
"नही.. ऐसे ही बता दो.." गौरी झेंप गयी..
"ठीक है.. अपने कपड़े निकाल दो.."
"नही.. पहले लाइट ऑफ!"
"लाइट बंद करने पर क्या फ़ायदा.. अगर देख ही ना पाए.."
"पर मुझे शर्म आ रही है.." गौरी अमित से नज़रें नही मिला पा रही थी..
"ठीक है.. तुम आँखें बंद कर लेना.. शरम भाग जाएगी..
"पर...." गौरी कुच्छ कहना चाह ही रही थी की अमित घुटनो के बल बैठा और उसकी टी-शर्ट नीचे कोनों से पकड़ कर उपर सरका दी.. ट्यूब-लाइट की रोशनी में गौरी के दूधिया कबूतर फड़फने लगे.. उनका आकर इतना मादक था की अमित पूरी शर्ट निकलना ही भूल गया और उसके गले में ही छ्चोड़ कर उसके गोल गोल अनारों को अपने हाथों में दबोच लिया...
"इष्हशह!" गौरी की कामुक सिसकी भी उसके बदन की तरह ही पागल कर देने वाली थी.. अमित के होंठों ने जैसे ही उसकी चूचियों से दूध निकालने की नाकामयाब कोशिश की.. गौरी का अंग अंग लहरा उठा.. वह मदहोश होकर बिस्तेर पर आ गिरी.. "आआआअह प्लस्ससस्स.. शियरट्ट तो.. आआह ...निकालने दो.."
"एक मिनिट!" कहते हुए अमित ने गौरी की चूचियों को चूस्ते हुए ही एक हाथ से उसकी शर्ट निकलवाने में मदद की.. वह इतनी मदहोश हो चुकी थी.. की सिसकिया लेते हुए बड़बड़ाने लगी,"आआह.. मुझे भी कुच्छ लेना है.."
नेकी और पूच्छ पूच्छ.. पलक झपकते ही अमित ने अपनी पॅंट अंडरवेर के साथ ही उतार फैंकी.. गौरी के लिए उसका ख़तनाक खिलौना तैयार खड़ा था.. तनटनाता हुआ..,"ये लो मेरी जान!" और घुटनो के बल होते हुए अमित ने अपना 'शेरू' गौरी के हाथों में पकड़ा दिया..
"यहाँ नही.. वहाँ.." गौरी का हाथ उसकी लोवर के उपर से ही मानो कुच्छ ढूँढ सा रहा था..
"जल्दी है क्या..?"
"हां.. दिशा और वाणी में से कोई उठ गयी तो.."
"ठीक है.. पूरा मज़ा फिर कभी.. पूरी जिंदगी पड़ी है.. चलो.. उल्टी लेट जाओ.."
"उल्टी क्यूँ.. ऐसे ही ठीक नही है क्या?"
"या तो तुम इनस्टरक्टर बन जाओ.. या फिर मेरी बात मान लो.." अमित ने धोंस सी दिखाई..
"ठीक है.. " गौरी ने कहा और अपनी छातियों के नीचे तकिया रखकर उल्टी होकर लेट गयी....
अमित ने एक पल भी ना लगाया और उसका लोवर और पॅंटी नीचे खींच कर नितंबों को आवरण हीन कर दिया...
"ओह माइ गॉड!... म्म्म्मममममहा!" गौर के गोरे गोरे मोटे मस्त नितंबों की सुंदरता और सुगधा देख कर अमित यही कह पाया.. "क्या माल हो यार तुम भी.."
दोनो फांकों के बीच की दरार अच्छि ख़ासी चौड़ी लग रही थी.. पर जब अमित ने उंगली घुसाने की कोशिश की तो अहसास हुआ.. कितनी टाइट है.. गहरी भी.. अमित ने फांको को अलग करके जहाँ तक अमित की नज़र गयी.. सब कुच्छ कोरा और गोरा था..
अमित ने बेड पर पड़ा तकिया उठाया और गौरी को अपने नितंब उपर उठाने का इशारा किया.. ज्यों ही गौरी उपर को हुई.. अमित ने तकिया उसके नीचे सेट कर दिया.. नितंबों की उँचाई और बढ़ गयी.. दरार और फैल गयी.. दरार के बीचों बीच दूधिया सफेद रंग की हल्के बालों वाली मच्चली मुस्कुरा रही थी.. अमित ने उपर से ही उसका दाना ढ़हूँढने की कोशिश की तो गौरी अंदर तक हिल गयी.. इतना आनंद उसको अपनी उंगली से कभी नही आया था..," प्लीज़ जल्दी करो.. मैं 2 बार तो पहले ही हो चुकी हूँ.."
"हूंम्म.. वो तो दिख ही रहा है.. रस से सनी अपनी उंगली बाहर निकालकर देखते हुए अमित ने फिदा हो चुकी नज़रों से उसको देखा.. बड़ी मादक गंध थी..
अमित ने उसकी टाँगों को थोड़ा दूर करके योनि चिद्रा को देखकर कहा..," तो पहली बार है.. नही?"
"क्या मतलब?" गौरी ने सच में उसका मतलब नही समझा..
"सेक्स.. और क्या?"
बात सुनकर गौरी को धक्का सा लगा.. अचानक पलटी खाकर बैठ गयी और अपने हर अंग को च्छुपाने की कोशिश करती हुई रोना सा मुँह बना लिया..
"क्या हुआ?"
"तो क्या तुम मुझे..." गौरी सच में रोने लगी...
"सॉरी जानू.. आइ वाज़ जस्ट जोकिंग.. मज़ाक कर रहा था यार.."
"नही.. मुझे नही करना.."
"प्लीज़ गौरी.. ऐसा मत करो.. छ्होटे से मज़ाक से ही रूठह गयी. तुम्हे तो पता है.. मेरी मज़ाक करने की आदत है.. रियली सॉरी यार.. प्लीज़" अमित ने उसको अपनी बाहों में भर लिया.. बड़ी मुश्किल से गौरी शांत हुई..
गौरी वापस उसी हालत में लेटने लगी तो अमित ने एकद्ूम शरीफों की तरह कहा," यहाँ से और उपर उठ जाओ ना.. प्लीज़.. घुटने बेड पर रख कर.. हां हां.. ऐसे ही.. अपना चेहरा बेड पर ही रखो.. यस यस ऐसे ही.. थॅंक यू!"
किसी ने सच ही कहा है..
"बिस्तेर पर तो रानी ही राजा होती है.. और राजा उसका सेवक" जाने कितनी ही सभ्यता एक ही घुड़की से अमित के बोल में आ गयी थी..
अमित ने जब इश्स अवस्था में गौरी के पिच्छवाड़े को देखा तो पागलपन में कोई कमी ना रही.. अमित ने एक से बढ़कर एक को देखा था पर गौरी के आगे तो सब पानी भरती ही लगी..
अमित के होंठ गौरी की चूत से खेलने लगे.. गौरी भी इश्स 'टच' से बदहवास सी सिसकिया ले लेकर अपने आपको ज़्यादा से ज़्यादा खोलने में लगी थी..
जी भर कर अमित ने रसास्वादन किया... चूत फूल कर और भी स्वदिस्त और सुंदर हो गयी थी...
ज़्यादा देर किस भी लिहाज से अब ठीक नही थी..
अमित ने उसके पिछे पोज़िशन ली और लंड का सूपड़ा गौरी की चिकनी चूत के मुंहने पर लगा दिया..," थोड़ा दर्द होगा.. एक बार.. सहन कर लेना प्लीज़.."
गौरी इश्स बात को समझती थी.. उसने अपना मुँह तकिये में दबा लिया और 'काम' कर्ण का इशारा किया..
'चिरर्र' की आवाज़ के साथ ही गौरी के गौरांग का श्री गणेश हो गया.. खून नही आया पर हालत खून ख़राबे से बदतर थी.. लंड कुच्छ दूरी तय करके जैसे जाम सा हो गया.. तकिये के अंदर से गौरी की घुटि हुई सी चीखें रह रह कर अमित को अभियान रोक देने पर विवश कर रही थी..
"चलो हो गया" की अनुभूति अमित को गौरी के उस अंदाज से हुई जब उसने तकिये से मुँह उठाकर एक लंबी साँस ली.. लंड भी तक तक गौरी की जड़ों तक 2-4 बार हो आया था.. अब गौरी के चेहरे पर असीम सुख और आनंद के भाव थे.. गौरी ने अपनी टाँगों को और ज़्यादा खोल दिया..
कसी हुई योनि में अब उसका लंड सररर सररर की आवाज़ के साथ अंदर बाहर हो रहा था.. अमित को करीब 15 मिनिट हो चुके थे बिना रुके बिना थके लगे हुए.. पर गौरी इश्स दौरान 2 बार स्वर्ग लोक हो आई थी..
अंत में जब अमित को अहसास हुआ की अब टिकना मुश्किल है तो उसने ढकधक धक्कों की गति तेज़ कर दी.. गौरी तीसरी बार 'आ' गयी..
गौरी की इश्स बार की लुंबी साँस के साथ ही अमित ने अपना हथियार बाहर खींच लिया.. अच्च्छा ही किया वरना सब कुच्छ अंदर ही हो जाता.. जस्न का जोश जारी था.. गाढ़े वीरया की पिचकारी पसारकार उल्टी लेट चुकी गौरी के नितंबों को निहाल करने लगी...
गौरी को जैसे इसी बात का इंतजार था.. झट से उठी और अपने को सॉफ करके कपड़े पहनती हुई बोली... "अगली बार देखूँगी तुमको.." कहते हुए अमित के होंठों का एक करारा चुंबन लिया और कपड़े पहेनकर चुपके से बाहर निकली.. और अपनी खाट पर जाकर इश्स प्रथम अनुभव की मिठास को अपने मॅन में महसूस करने लगी...
अंदर बैठा अमित खुद ब खुद मुस्कुरा रहा था,"क्या गन्ना था.. कसम से!"
पर उसका तो यही तराना था.. गन्ना उखाड़ो और खेत से बाहर!
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